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पानी पानी हो गया जोश अब्र-ए-दरिया-बार का | शाही शायरी
pani pani ho gaya josh abr-e-dariya-bar ka

ग़ज़ल

पानी पानी हो गया जोश अब्र-ए-दरिया-बार का

दत्तात्रिया कैफ़ी

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पानी पानी हो गया जोश अब्र-ए-दरिया-बार का
देख कर तूफ़ाँ हमारे दीदा-हा-ए-ज़ार का

चश्म-ए-हमदर्दी मरीज़-ए-इश्क़ इन आँखों से न रख
काम क्या निकले भला बीमार से बीमार का

दिल से हमदम ने रह-ए-उल्फ़त में ये धोका दिया
क्या करे अब कोई दुनिया में भरोसा यार का

दिल दिया जिस को उसी ने दाग़-ए-मायूसी दिया
रास ही आया न हम को हाए करना प्यार का

या मिटाया उस का लिखवाया मैं ख़ुद ही मिट गया
ऐ मुक़द्दर अब तो ये सर और दर है यार का

हम ने 'कैफ़ी' ख़ूब ही आँखें लड़ाईं उस से कल
कर दिया सारा हिरन नश्शा निगाह-ए-यार का