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नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम | शाही शायरी
nazar aa rahe hain jo tanha se hum

ग़ज़ल

नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम

अजमल सिराज

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नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम
सो यूँ है कि भर पाए दुनिया से हम

न पर्वा हमें हाल-ए-बेहाल की
न शर्मिंदा उम्र-ए-गुज़िश्ता से हम

भला कोई करता है मुर्दों से बात
कहें क्या दिल-ए-बे-तमन्ना से हम

नज़र में है जब से सरापा तिरा
जभी से हैं कुछ बे-सर-ओ-पा से हम

कोई जल-परी क्या परी भी न आई
मगर ख़ुश हुए रात दरिया से हम

तमाशाई शश-जिहत हैं सो हैं
ख़ुद अपने लिए भी तमाशा से हम

समझना था दुनिया को यूँ भी मुहाल
समझते थे दुनिया को दुनिया से हम