नया सौदा नया दर्द-ए-निहानी ले के आया हूँ
नई उस बज़्म से मैं ज़िंदगानी ले के आया हूँ
कुछ अपनी ना-तवानी कुछ तिरा पास-ए-नज़ाकत था
निगाहों में मोहब्बत की कहानी ले के आया हूँ
तिरे जल्वे के नज़्ज़ारे को ख़ाली हाथ क्या आता
लुटाने को बहार-ए-नौजवानी ले के आया हूँ
लबों पर मोहर-ए-ख़ामोशी है आँखें डबडबाई हैं
असर-अंदाज़ अपनी बे-ज़बानी ले के आया हूँ
ख़ुदा-मालूम क़ासिद क्या सुनाए दिल धड़कता है
ये कहता है कि पैग़ाम-ए-ज़बानी ले के आया हूँ
मिज़ा पर गर्म गर्म आँसू लबों पर सर्द सर्द आहें
फ़साना दर्द का ग़म की कहानी ले के आया हूँ
सरिश्क-ए-ख़ूँ दिल-ए-पुर-दाग़ अफ़्सुर्दा तमन्नाएँ
अज़ल से ये मताअ-ए-ज़िंदगानी ले के आया हूँ
मक़ाम-ए-ख़िज़्र था या मै-कदा था क्या कहूँ क्या था
जहाँ से मैं हयात-ए-जावेदानी ले के आया हूँ
'जलील' अब्र-ए-सियह क्या झूमता है सब्ज़ा-ज़ारों पर
ये कहता है कि आब-ए-ज़ि़ंदगानी ले के आया हूँ
ग़ज़ल
नया सौदा नया दर्द-ए-निहानी ले के आया हूँ
जलील मानिकपूरी

