नौबत अपनी तो जान तक पहुँची
हैफ़ उस के न कान तक पहुँची
दिल के टुकड़े हैं ये सितारे न हों
आह लय आसमान तक पहुँची
है वो आज़ुर्दा बात शिकवे की
क्या किसी मेहरबान तक पहुँची
मुफ़्त फ़र्सूदा हुइ ये पेशानी
न तिरे आस्तान तक पहुँची
दुश्मनी मुझ से तेरी तेग़ ने की
दोस्ती इम्तिहान तक पहुँची
आतिश-ए-इश्क़ ने जो सर खींचा
हुस्न के दूदमान तक पहुँची
बार-ए-ग़म जब किसी से उठ न सका
नौबत इस ना-तवान तक पहुँची
तेरे मक़्तूल का है काम तमाम
कारवाँ उस्तुख़्वान तक पहुँची
आतिश-ए-गुल से जलती मिस्ल-ए-शरर
अंदलीब आशियान तक पहुँची
कोई सर-गश्ता याद आ ही गया
तेग़ उस की जो सान तक पहुँची
देखते उस को महव थे 'जोशिश'
कब शिकायत ज़बान तक पहुँची
ग़ज़ल
नौबत अपनी तो जान तक पहुँची
जोशिश अज़ीमाबादी

