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नावक कहें सिनाँ कहें तलवार क्या कहें | शाही शायरी
nawak kahen sinan kahen talwar kya kahen

ग़ज़ल

नावक कहें सिनाँ कहें तलवार क्या कहें

मुबारक अज़ीमाबादी

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नावक कहें सिनाँ कहें तलवार क्या कहें
तू ही बता तुझे निगह-ए-यार क्या कहें

शिकवा न दाम का है न सय्याद का गिला
हम आप हो गए हैं गिरफ़्तार क्या कहें

इज़हार-ए-हाल-ए-ज़ार का ऐसों से फ़ाएदा
आज़ार दिल का तुझ से दिल-आज़ार क्या कहें

करते हैं वाइज़ आप मज़म्मत शराब की
कहते हैं क्या जनाब को मय-ख़्वार क्या कहें

ऐसों से तर्क-ए-मय का 'मुबारक' सवाल क्या
तौबा की तुझ से रिंद-ए-क़दह-ख़्वार क्या कहें