EN اردو
नाहक़ शिकायत-ए-ग़म-ए-दुनिया करे कोई | शाही शायरी
nahaq shikayat-e-gham-e-duniya kare koi

ग़ज़ल

नाहक़ शिकायत-ए-ग़म-ए-दुनिया करे कोई

सीमाब अकबराबादी

;

नाहक़ शिकायत-ए-ग़म-ए-दुनिया करे कोई
ग़म है बड़ी ख़ुशी जो गवारा करे कोई

रग रग में दिल की जज़्ब है महशर-ए-उमीद
अंदाज़ा-ए-हुजूम-ए-तमन्ना करे कोई

है उन के आस्ताँ पे हुजूम-ए-ग़ुरूर-ओ-नाज़
गुंजाइ-ए-शजबीं हो तो सज्दा करे कोई

यूसुफ़ ग़यूर फ़ितरत-ए-यूसुफ़ ग़यूर-ए-तर
क्या ए'तिबार-ए-ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा करे कोई

हर शख़्स है ख़राब-ए-तमन्ना ब-क़द्र-ए-ज़ौक़
'सीमाब' किस से अर्ज़-ए-तमन्ना करे कोई