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मुझे प्यार से तिरा देखना मुझे छुप छुपा के वो देखना | शाही शायरी
mujhe pyar se tera dekhna mujhe chhup chhupa ke wo dekhna

ग़ज़ल

मुझे प्यार से तिरा देखना मुझे छुप छुपा के वो देखना

फ़ना निज़ामी कानपुरी

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मुझे प्यार से तिरा देखना मुझे छुप छुपा के वो देखना
मिरा सोया जज़्बा उभारना तुम्हें याद हो कि न याद हो

रह-ओ-रस्म क़ल्ब ओ निगाह के वो तुम्हारे दावे निबाह के
वो हमारा शेख़ी बघारना तुम्हें याद हो कि न याद हो

वो हमारी छेड़ वो शोख़ियाँ वो हमारा काटना चुटकियाँ
वो तुम्हारा कुहनी का मारना तुम्हें याद हो कि न याद हो

कभी सर्द आहों के सिलसिले कभी ठंडी साँसों के मश्ग़ले
वो हमारी नक़लें उतारना तुम्हें याद हो कि न याद हो

वो तुम्हारा शाएर-ए-ख़ुश-नवा जिसे लोग कहने लगे 'फ़ना'
वो 'निसार' कह के पुकारना तुम्हें याद हो कि न याद हो