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मुझे फ़िक्र-ओ-सर-ए-वफ़ा है हनूज़ | शाही शायरी
mujhe fikr-o-sar-e-wafa hai hanuz

ग़ज़ल

मुझे फ़िक्र-ओ-सर-ए-वफ़ा है हनूज़

सीमाब अकबराबादी

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मुझे फ़िक्र-ओ-सर-ए-वफ़ा है हनूज़
बादा-ए-इश्क़ ना-रसा है हनूज़

ओ नज़र दिल से फेरने वाले
दिल तुझी पर मिटा हुआ है हनूज़

सारी दुनिया हो ना-उमीद तो क्या
मुझे तेरा ही आसरा है हनूज़

आस्ताँ से अभी नज़र न हटा
कोई तक़दीर-आज़मा है हनूज़

मह्विय्यत बे-सबब नहीं 'सीमाब'
रूह पर कोई छा रहा है हनूज़