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मिरे लिए तिरा होना अहम ज़ियादा है | शाही शायरी
mere liye tera hona aham ziyaada hai

ग़ज़ल

मिरे लिए तिरा होना अहम ज़ियादा है

अहमद अता

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मिरे लिए तिरा होना अहम ज़ियादा है
ये बाक़ी ज़िक्र-ए-वजूद-ओ-अदम ज़ियादा है

वो ख़ाली-पन है कहीं कुछ कशिश नहीं है मुझे
कोई ख़ुशी है बहुत और न ग़म ज़ियादा है

तिरे बग़ैर ज़रूरत ही किया पड़ी है मुझे
तिरे बग़ैर ये दम है सो दम ज़ियादा है

ये मेरी आँख है याँ ख़्वाब कैसे ठहरेंगे
कि सीम-ख़ुर्दा ज़मीं है जो नम ज़ियादा है

मिरा ये दिल कि जिसे कोई पेच-ओ-ताब नहीं
तिरी ये ज़ुल्फ़ जिसे पेच-ओ-ख़म ज़ियादा है

तू ख़ूब जानता है यार-ए-बे-नियाज़ कि अब
जुनूँ बहुत है मुझे फिर भी कम ज़ियादा है