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जो ये दिल है तो क्या सर-अंजाम होगा | शाही शायरी
jo ye dil hai to kya sar-anjam hoga

ग़ज़ल

जो ये दिल है तो क्या सर-अंजाम होगा

मीर तक़ी मीर

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जो ये दिल है तो क्या सर-अंजाम होगा
ता-ख़ाक भी ख़ाक आराम होगा

मिरा-जी तो आँखों में आया ये सुनते
कि दीदार भी एक दिन आम होगा

न होगा वो देखा जिसे कब्क तू ने
वो इक बाग़ का सर्व-अंदाम होगा

न निकला कर इतना भी बे-पर्दा घर से
बहुत उस में ज़ालिम तो बदनाम होगा

हज़ारों की याँ लग गईं छत से आँखें
तू ऐ माह किस शब-ए-लब-ओ-बाम होगा

वो कुछ जानता होगा ज़ुल्फ़ों में फँसना
जो कोई असीर ता-दाम होगा

जिगर चाकी नाकामी दुनिया है आख़िर
नहीं आए जो 'मीर' कुछ काम होगा