जफ़ाएँ देख लियाँ बेवफ़ाइयाँ देखीं
भला हुआ कि तिरी सब बुराइयाँ देखीं
तिरी गली से सदा ऐ कशंदा-ए-आलम
हज़ारों आती हुई चारपाइयाँ देखीं
गया नज़र से जो वो गर्म तिफ़्ल आतिश-बाज़
हम अपने चेहरे पे उड़ती हवाइयाँ देखीं
तिरे विसाल के हम शौक़ में हो आवारा
अज़ीज़ दोस्त सभों की जुदाइयाँ देखीं
हमेशा माइल आईना ही तुझे पाया
जो देखें हम ने यही ख़ुद नुमाइयाँ देखीं
शहाँ कि कुहल जवाहर थी ख़ाक-ए-पा जिन की
उन्हीं की आँखों में फिरते सलाइयाँ देखीं
बनी न अपनी तो उस जंग-जू से हरगिज़ 'मीर'
लड़ाएँ जब से हम आँखें लड़ाइयाँ देखीं
ग़ज़ल
जफ़ाएँ देख लियाँ बेवफ़ाइयाँ देखीं
मीर तक़ी मीर

