मिलना नहीं तो याद उसे करना भी छोड़ दे
दीवार छोड़ दी है तो साया भी छोड़ दे
इक आदमी से तर्क-ए-मरासिम के बा'द अब
क्या उस गली से कोई गुज़रना भी छोड़ दे
आना अब उस ने छोड़ दिया है अगर तो क्या
दिल बे-सबब चराग़ जलाना भी छोड़ दे
मज़बूत कश्तियों को बचाने के वास्ते
दरिया में एक नाव शिकस्ता भी छोड़ दे
अल्लाह की ज़मीन बड़ी है बहुत 'जमाल'
इज़्ज़त नहीं जहाँ वहाँ रहना भी छोड़ दे
ग़ज़ल
मिलना नहीं तो याद उसे करना भी छोड़ दे
जमाल एहसानी

