में इक गाँव का शाएर हूँ
खुली फ़ज़ाओं का शाएर हूँ
धूप में खेती पर लहराऊँ
नर्म हवाओं का शाएर हूँ
मेरे दम से हैं ये मौसम
धूप और छाँव का शाएर हूँ
सहरा सहरा नाम है मेरा
में दरियाओं का शाएर हूँ
सूरज मेरा रस्ता रोके
में कि घटाओं का शाएर हूँ
बहरों की बस्ती का गाहक
ना-बीनाओं का शाएर हूँ
ग़ज़ल
में इक गाँव का शाएर हूँ
फ़ारूक़ नाज़की

