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मस्त हूँ मस्त हूँ ख़राब ख़राब | शाही शायरी
mast hun mast hun KHarab KHarab

ग़ज़ल

मस्त हूँ मस्त हूँ ख़राब ख़राब

दाऊद औरंगाबादी

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मस्त हूँ मस्त हूँ ख़राब ख़राब
साक़िया साक़िया शराब शराब

आतिश-ए-इश्क़ सूँ तिरी जल जल
दिल हुआ दिल हुआ कबाब कबाब

दूर मुख सूँ अरक़ न कर गुल-रू
दे मुझे दे मुझे गुलाब गुलाब

कह अपस चश्म-ए-बा-हया कूँ सनम
रफ़'अ कर रफ़'अ कर हिजाब हिजाब

देख छुपता है अब्र में ख़ुर्शीद
दूर कर दूर कर नक़ाब नक़ाब

मुंतज़िर दिल है यार के ख़त का
क़ासिद आ क़ासिद आ शिताब शिताब

शेवा-ए-गुल-रुख़ाँ है ऐ 'दाऊद'
ग़म्ज़ा ओ ग़म्ज़ा ओ इताब इताब