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मस्त अँखियाँ का देख दुम्बाला | शाही शायरी
mast ankhiyan ka dekh dumbaala

ग़ज़ल

मस्त अँखियाँ का देख दुम्बाला

अब्दुल वहाब यकरू

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मस्त अँखियाँ का देख दुम्बाला
दिल मिरा हो गया है मतवाला

लब तिरे ला'ल हैं बदख़्शाँ के
दाँत तेरे हैं लूलू ऐ लाला

देख गुलशन में आतिशीं रुख़्सार
दाग़ हो जल गया गुल-ए-लाला

अश्क दरिया नमन नयन सीं चलें
जब करूँ दर्द-ए-दिल सती नाला

बर में 'यकरू' के क्यूँ न आया हाए
दे गया मुझ कूँ सर्व-क़द बाला