EN اردو
मैं तिरी मानता लेकिन जो मिरा दिल है ना | शाही शायरी
main teri manta lekin jo mera dil hai na

ग़ज़ल

मैं तिरी मानता लेकिन जो मिरा दिल है ना

अहमद अता

;

मैं तिरी मानता लेकिन जो मिरा दिल है ना
दर का पत्थर है हटाना इसे मुश्किल है ना

ये तिरा हुस्न कुछ ऐसा नहीं पूजें जिस को
लेकिन ऐ यार तिरे गाल का जो तिल है ना

जो मिरे वास्ते दिन रात दुआ करते हैं
दुश्मन-ए-जाँ ये बता उन में तू शामिल है ना

माँगना आता नहीं और ख़ुदा कहता है
ऐ फ़रिश्तो इसे देखो ये जो साइल है ना

ज़िंदगी इश्क़ में गुज़रे तो क़सीदा लिक्खूँ
कि वही एक क़सीदा तिरे क़ाबिल है ना