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महफ़िलों में जा के घबराया किए | शाही शायरी
mahfilon mein ja ke ghabraya kiye

ग़ज़ल

महफ़िलों में जा के घबराया किए

बाक़र मेहदी

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महफ़िलों में जा के घबराया किए
दिल को अपने लाख समझाया किए

यास की गहराइयों में डूब कर
ज़ख़्म-ए-दिल से ख़ुद को बहलाया किए

तिश्नगी में यास ओ हसरत के चराग़
ग़म-कदे में अपने जल जाया किए

ख़ुद-फ़रेबी का ये आलम था कि हम
आईना दुनिया को दिखलाया किए

ख़ून-ए-दिल उनवान-ए-हस्ती बन गया
हम तो अपने साज़ पर गाया किए