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लम्हा लम्हा शुमार कौन करे | शाही शायरी
lamha lamha shumar kaun kare

ग़ज़ल

लम्हा लम्हा शुमार कौन करे

अहमद राही

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लम्हा लम्हा शुमार कौन करे
उम्र भर इंतिज़ार कौन करे

कोई व'अदा भी तो वफ़ा न हुआ
बे-वफ़ाओं से प्यार कौन करे

शब-ए-तीरा-ओ-तार का दामन
देखिए तार तार कौन करे

दोस्ती एक लफ़्ज़-ए-बे-मअ'नी
किस पे अब इंहिसार कौन करे

ऐ ग़म-ए-दोस्त तेरे होते हुए
ग़म-ए-लैल-ओ-नहार कौन करे

तेरे इस दर्द-ए-ला-दवा का इलाज
दिल-ए-ज़ार-ओ-नज़ार कौन करे

सिलसिला टूटना था टूट गया
अब उसे उस्तुवार कौन करे