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ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है | शाही शायरी
KHwab mein jo kuchh dekh raha hun us ka dikhana mushkil hai

ग़ज़ल

ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है

क़मर जमील

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ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है
आईने में फूल खिला है हाथ लगाना मुश्किल है

उस के क़दम से फूल खिले हैं मैं ने सुना है चार तरफ़
वैसे इस वीरान-सरा में फूल खिलाना मुश्किल है

तन्हाई में दिल का सहारा एक हवा का झोंका था
वो भी गया है सू-ए-बयाबाँ उस का आना मुश्किल है

शीशा-गरों के घर में सुना है एक परी कल आई थी
वैसे ख़याल-ओ-ख़्वाब हैं परियाँ उन का आना मुश्किल है