EN اردو
ख़ुदा मिरे दिल-ए-पुर-ख़ूँ को दाग़-दार करे | शाही शायरी
KHuda mere dil-e-pur-KHun ko dagh-dar kare

ग़ज़ल

ख़ुदा मिरे दिल-ए-पुर-ख़ूँ को दाग़-दार करे

इश्क़ औरंगाबादी

;

ख़ुदा मिरे दिल-ए-पुर-ख़ूँ को दाग़-दार करे
जो लाला-ज़ार मिरी ख़ाक से बहार करे

मुराद-ए-दिल है यही आरज़ू-ए-दिल है यही
ख़ुदा मुझे तिरी उल्फ़त से इश्तिहार करे

बना है शीशा-ए-साअत मिरा दिल-ए-नाज़ुक
ग़ुबार-ए-ख़ातिर-ए-याराँ का ता शुमार करे

फ़रौतनी के तसद्दुक़ से है सुबुक-पर्वाज़
न सर-कशी पे शरर अपनी इफ़्तिख़ार करे