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ख़ुद अपने हाथ से क्या क्या हुआ नहीं मिरे साथ | शाही शायरी
KHud apne hath se kya kya hua nahin mere sath

ग़ज़ल

ख़ुद अपने हाथ से क्या क्या हुआ नहीं मिरे साथ

अंजुम सलीमी

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ख़ुद अपने हाथ से क्या क्या हुआ नहीं मिरे साथ
मैं क्या कहूँ मिरा कुछ भी गिला नहीं मिरे साथ

मैं उस के साथ हूँ बे-शक मैं उस के पास नहीं
वो मेरे पास था लेकिन वो था नहीं मिरे साथ

निकल पड़ा हूँ किसी को मिले बताए बग़ैर
सफ़र ब-ख़ैर कोई भी दुआ नहीं मिरे साथ

वो मेरे दुख में मरा जा रहा है हैरत है
जो एक दिन भी ख़ुशी से जिया नहीं मिरे साथ

ख़ुदा की राह में निकला हूँ मैं तन-ए-तन्हा
ये पहली बार हुआ है ख़ुदा नहीं मिरे साथ