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ख़ैर से अब है वहाँ आप का बीमार कि बस | शाही शायरी
KHair se ab hai wahan aap ka bimar ki bas

ग़ज़ल

ख़ैर से अब है वहाँ आप का बीमार कि बस

दिल अय्यूबी

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ख़ैर से अब है वहाँ आप का बीमार कि बस
इस क़दर देर लगा दी मिरे सरकार कि बस

सेर होता ही नहीं ज़ौक़-ए-तमाशा लेकिन
मुझ से कहती है मिरी जुरअत-ए-दीदार कि बस

हिज्र के नाम पे भी वस्ल के उन्वान से भी
इश्क़ ने इतने दिए हैं मुझे आज़ार कि बस

किस क़दर थी वो नज़र आइना-किरदार न पूछ
इस क़दर चूर हुआ है बुत-ए-पिंदार कि बस

न ग़म-ए-दिल के ही बस के न ग़म-ए-दौराँ के
इतने आज़ाद हुए तेरे गिरफ़्तार कि बस