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कौन हमारा दर्द बटाए कौन हमारा थामे हात | शाही शायरी
kaun hamara dard baTae kaun hamara thame hat

ग़ज़ल

कौन हमारा दर्द बटाए कौन हमारा थामे हात

जमील मलिक

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कौन हमारा दर्द बटाए कौन हमारा थामे हात
उन के नगर में जगमग-जगमग अपने देस में रात ही रात

नीले नीले अम्बर पर वो चाँद वो किरनों की बरसात
हम दोनों खोए खोए से हाए वो मस्त-मनोहर घात

तू गुलशन गुलशन इठलाए मैं सहरा सहरा भटकूँ
दिल का ये सौदा है वर्ना तेरा और मेरा क्या सात

सब दुनिया-दारी की बातें दिल में और ज़बाँ पर और
तुझ से प्यार बढ़ा कर आख़िर जान गए तेरी औक़ात

चाहे अब इस को अपनाओ चाहे नाज़ से ठुकराओ
आज से अपना दख़्ल नहीं है दिल की डोर तुम्हारे हात

दुनिया का मंशा है प्यारे हम घुट घुट कर मर जाएँ
दिल की धड़कन ये कहती है इक दिन बदलेंगे हालात

एक अनोखी लय से मैं ने सब के दिल पिघलाए हैं
दुनिया को ये वहम कि मेरे होंटों पर है अपनी बात