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कौन बुतों से रिश्ता जोड़े | शाही शायरी
kaun buton se rishta joDe

ग़ज़ल

कौन बुतों से रिश्ता जोड़े

शाद आरफ़ी

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कौन बुतों से रिश्ता जोड़े
नाम बड़े और दर्शन थोड़े

उस पर ये भरपूर जवानी
बाँहें भर ले और न छोड़े

जोबन को ये अक़्ल कहाँ है
चादर इतने पाँव सिकोड़े

छलके सागर आँख नशीली
नर्गिस में अंगूर निचोड़े

हाल से मुस्तक़बिल बनता है
फूट बहेंगे पक्के फोड़े

पीठ न दे आज़ादा-रवी को
सीने पर खा ज़ख़्म भगोड़े

'शाद' नए हालात में हूँ मैं
मुझ को क्या मज़मून के तोड़े