EN اردو
कहा किस ने कि तुम ये वो न बोलो | शाही शायरी
kaha kis ne ki tum ye wo na bolo

ग़ज़ल

कहा किस ने कि तुम ये वो न बोलो

मिर्ज़ा अज़फ़री

;

कहा किस ने कि तुम ये वो न बोलो
मैं जाऊँ और नहीं जी दो न बोलो

मिरा गुल-रू बना है इश्क़ ओ बू को
हो आशिक़ या न हो बोलो न बोलो

न दिन दिखलावे हक़ जाने की रातें
नहीं का चोचला भूलो न बोलो

कहें जो नेक ओ बद तुम बे-दिलों को
दुर-ए-अश्क अपने जब रोलो न बोलो

सुनो शेर 'अज़फ़री' का अहल-ए-मद्रास
तुम उर्दू बीच इसे भूलो न बोलो