EN اردو
जाती रुत से प्यार करोगे | शाही शायरी
jati rut se pyar karoge

ग़ज़ल

जाती रुत से प्यार करोगे

गौहर होशियारपुरी

;

जाती रुत से प्यार करोगे
कर लो बात उधार करोगे

तब मिल कर एहसान किया था
अब मिल कर ईसार करोगे

जितने ख़्वाब उतनी ताबीरें
कितने दाग़ शुमार करोगे

ऐ इंकार के ख़ूगर लोगो
और भी कोई वार करोगे

उस के नाम को नाव बना कर
प्यासों को सरशार करोगे

फ़र्ज़ करो हम मर न सके तो
जीने से इंकार करोगे

फ़र्ज़ करो हम हार गए तो
क़ब्र कहाँ तय्यार करोगे