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हुस्न-ए-बे-परवा ख़रीदार-ए-माता-ए-जल्वा है | शाही शायरी
husn-e-be-parwa KHaridar-e-mata-e-jalwa hai

ग़ज़ल

हुस्न-ए-बे-परवा ख़रीदार-ए-माता-ए-जल्वा है

मिर्ज़ा ग़ालिब

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हुस्न-ए-बे-परवा ख़रीदार-ए-माता-ए-जल्वा है
आइना ज़ानू-ए-फ़िक्र-ए-इख़्तिरा-ए-जल्वा है

ता-कुजा ऐ आगही रंग-ए-तमाशा बाख़्तन
चश्म-ए-वा-गर्दीदा आग़ोश-ए-विदा-ए-जल्वा है