EN اردو
घर में था क्या कि तिरा ग़म उसे ग़ारत करता | शाही शायरी
ghar mein tha kya ki tera gham use ghaarat karta

ग़ज़ल

घर में था क्या कि तिरा ग़म उसे ग़ारत करता

मिर्ज़ा ग़ालिब

;

घर में था क्या कि तिरा ग़म उसे ग़ारत करता
वो जो रखते थे हम इक हसरत-ए-तामीर सो है