दिल से है बहुत गुरेज़-पा तू
तू कौन है और है भी क्या तू
क्यूँ मुझ में गँवा रहा है ख़ुद को
मुझ ऐसे यहाँ हज़ार-हा तू
है तेरी जुदाई और मैं हूँ
मिलते ही कहीं बिछड़ गया तू
पूछे जो तुझे कोई ज़रा भी
जब मैं न रहूँ तो देखना तू
इक साँस ही बस लिया है मैं ने
तू साँस न था सो क्या हुआ तू
है कौन जो तेरा ध्यान रखे
बाहर मिरे बस कहीं न जा तो
ग़ज़ल
दिल से है बहुत गुरेज़-पा तू
जौन एलिया

