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दिल से है बहुत गुरेज़-पा तू | शाही शायरी
dil se hai bahut gurez-pa tu

ग़ज़ल

दिल से है बहुत गुरेज़-पा तू

जौन एलिया

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दिल से है बहुत गुरेज़-पा तू
तू कौन है और है भी क्या तू

क्यूँ मुझ में गँवा रहा है ख़ुद को
मुझ ऐसे यहाँ हज़ार-हा तू

है तेरी जुदाई और मैं हूँ
मिलते ही कहीं बिछड़ गया तू

पूछे जो तुझे कोई ज़रा भी
जब मैं न रहूँ तो देखना तू

इक साँस ही बस लिया है मैं ने
तू साँस न था सो क्या हुआ तू

है कौन जो तेरा ध्यान रखे
बाहर मिरे बस कहीं न जा तो