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दिल परेशाँ है क्या किया जाए | शाही शायरी
dil pareshan hai kya kiya jae

ग़ज़ल

दिल परेशाँ है क्या किया जाए

जौन एलिया

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दिल परेशाँ है क्या किया जाए
अक़्ल हैराँ है क्या किया जाए

शौक़-ए-मुश्किल-पसंद उन का हुसूल
सख़्त आसाँ है क्या किया जाए

इश्क़-ए-ख़ूबाँ के साथ ही हम में
नाज़-ए-ख़ूबाँ है क्या किया जाए

बे-सबब ही मिरी तबीअत-ए-ग़म
सब से नालाँ है क्या किया जाए

बावजूद उन की दिल-नवाज़ी के
दिल गुरेज़ाँ है क्या किया जाए

मैं तो नक़्द-ए-हयात लाया था
जिंस-ए-अर्ज़ां है क्या किया जाए

हम समझते थे इश्क़ को दुश्वार
ये भी आसाँ है क्या किया जाए

वो बहारों की नाज़-पर्वर्दा
हम पे नाज़ाँ है क्या किया जाए

मिस्र-ए-लुत्फ़-ओ-करम में भी ऐ 'जौन'
याद-ए-कनआँ है क्या किया जाए