दिल परेशाँ है क्या किया जाए
अक़्ल हैराँ है क्या किया जाए
शौक़-ए-मुश्किल-पसंद उन का हुसूल
सख़्त आसाँ है क्या किया जाए
इश्क़-ए-ख़ूबाँ के साथ ही हम में
नाज़-ए-ख़ूबाँ है क्या किया जाए
बे-सबब ही मिरी तबीअत-ए-ग़म
सब से नालाँ है क्या किया जाए
बावजूद उन की दिल-नवाज़ी के
दिल गुरेज़ाँ है क्या किया जाए
मैं तो नक़्द-ए-हयात लाया था
जिंस-ए-अर्ज़ां है क्या किया जाए
हम समझते थे इश्क़ को दुश्वार
ये भी आसाँ है क्या किया जाए
वो बहारों की नाज़-पर्वर्दा
हम पे नाज़ाँ है क्या किया जाए
मिस्र-ए-लुत्फ़-ओ-करम में भी ऐ 'जौन'
याद-ए-कनआँ है क्या किया जाए
ग़ज़ल
दिल परेशाँ है क्या किया जाए
जौन एलिया

