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देखा किसी ने हम से ज़माने ने क्या किया | शाही शायरी
dekha kisi ne humse zamane ne kya kiya

ग़ज़ल

देखा किसी ने हम से ज़माने ने क्या किया

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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देखा किसी ने हम से ज़माने ने क्या किया
और क्या कहें कि यार यगाने ने क्या किया

दिल चाहता हूँ और को दूँ तेरे जौर से
कहना न फिर कि हम से फ़ुलाने ने क्या किया

क़ातिल तो उस का हर सर-ए-मू बाल-पन से था
आराइश उस की ज़ुल्फ़ को शाने ने क्या किया

दीनार और दिरम की न ला दिल को दाम में
क़ारूँ से है ख़बर कि ख़ज़ाने ने क्या किया

'हातिम' दिया है शैख़ ने अब दिल सनम के हाथ
दीवाना मैं तो था ये सियाने ने क्या किया