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ये देखें राज़-ए-दिल अब कौन करता है अयाँ पहले | शाही शायरी
ye dekhen raaz-e-dil ab kaun karta hai ayan pahle

ग़ज़ल

ये देखें राज़-ए-दिल अब कौन करता है अयाँ पहले

अर्श सहबाई

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ये देखें राज़-ए-दिल अब कौन करता है अयाँ पहले
नज़र करती है इज़हार-ए-मोहब्बत या ज़बाँ पहले

अगर हो देखना मक़्सूद बर्बादी का नज़्ज़ारा
जिला कर देखिए इक बार अपना आशियाँ पहले

पहुँच कर मंज़िल-ए-हस्ती पे ये एहसास होता है
कि गुज़रे हैं यहाँ से और भी कुछ कारवाँ पहले

कई मासूम कलियाँ जो अभी खिलने न पाई हूँ
मसल देते हैं अपने हाथ से ख़ुद बाग़बाँ पहले

ठहर ऐ गर्दिश-ए-अय्याम हम भी साथ चलते हैं
उठा लेने दे फ़ैज़-ए-सोहबत-ए-पीर-ए-मुग़ाँ पहले