अपने बच्चों को मैं बातों में लगा लेता हूँ
जब भी आवाज़ लगाता है खिलौने वाला
राशिद राही
लोग पत्थर के थे फ़रियाद कहाँ तक करते
दिल के वीराने हम आबाद कहाँ तक करते
राशिद तराज़
बाज़ार जहाँ में कोई ख़्वाहाँ नहीं तेरा
ले जाएँ कहाँ अब तुझे ऐ जिंस-ए-वफ़ा हम
रासिख़ अज़ीमाबादी
जब तुझे ख़ुद आप से बेगानगी हो जाएगी
आश्ना तब तुझ से वो देर-आश्ना हो जाएगा
रासिख़ अज़ीमाबादी
जब तुझे ख़ुद आप से बेगानगी हो जाएगी
आश्ना तब तुझ से वो देर-आश्ना हो जाएगा
रासिख़ अज़ीमाबादी
शागिर्द हैं हम 'मीर' से उस्ताद के 'रासिख़'
उस्तादों का उस्ताद है उस्ताद हमारा
रासिख़ अज़ीमाबादी
अटा है शहर बारूदी धुएँ से
सड़क पर चंद बच्चे रो रहे हैं
रासिख़ इरफ़ानी

