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शुजा ख़ावर शायरी | शाही शायरी

शुजा ख़ावर शेर

34 शेर

सभी ज़िंदगी पे फ़रेफ़्ता कोई मौत पर नहीं शेफ़्ता
सभी सूद-ख़ोर तो हो गए हैं कोई पठान नहीं रहा

शुजा ख़ावर




तंगी-ए-हैअत से टकराता हुआ जोश-ए-मवाद
शायरी का लुत्फ़ आ जाता है छोटी बहर में

शुजा ख़ावर




'शुजा' मौत से पहले ज़रूर जी लेना
ये काम भूल न जाना बड़ा ज़रूरी है

शुजा ख़ावर




'शुजा' वो ख़ैरियत पूछें तो हैरत में न पड़ जाना
परेशाँ करने वाले ख़ैर-ख़्वाहों में भी होते हैं

शुजा ख़ावर




सर्दी भी ख़त्म हो गई बरसात भी गई
और इस के साथ गर्मी-ए-जज़्बात भी गई

शुजा ख़ावर




सातों आलम सर करने के बा'द इक दिन की छुट्टी ले कर
घर में चिड़ियों के गाने पर बच्चों की हैरानी देखो

शुजा ख़ावर




रिंद खड़े हैं मिम्बर मिम्बर
और वाइज़ ने पी रक्खी है

शुजा ख़ावर




तंहाई का इक और मज़ा लूट रहा हूँ
मेहमान मिरे घर में बहुत आए हुए हैं

शुजा ख़ावर




सब का ही नाम लेते हैं इक तुझ को छोड़ कर
ख़ासा शुऊर है हमें वहशत के बावजूद

शुजा ख़ावर