EN اردو
बशीर बद्र शायरी | शाही शायरी

बशीर बद्र शेर

159 शेर

कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह दिया
तू नहीं मेरा तो कोई दूसरा हो जाएगा

बशीर बद्र




कोई बादल हो तो थम जाए मगर अश्क मिरे
एक रफ़्तार से दिन रात बराबर बरसे

बशीर बद्र




कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो

बशीर बद्र




कोई फूल सा हाथ काँधे पे था
मिरे पाँव शो'लों पे जलते रहे

बशीर बद्र




कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

she would have had compulsions surely
faithless without cause no one can be

बशीर बद्र




लोबान में चिंगारी जैसे कोई रख जाए
यूँ याद तिरी शब भर सीने में सुलगती है

बशीर बद्र




लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में

बशीर बद्र




मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा
आग से आग बुझा फूल खिला जाम उठा

बशीर बद्र




महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से
ख़ुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है

बशीर बद्र