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अर्श मलसियानी शायरी | शाही शायरी

अर्श मलसियानी शेर

23 शेर

न नशेमन है न है शाख़-ए-नशेमन बाक़ी
लुत्फ़ जब है कि करे अब कोई बर्बाद मुझे

अर्श मलसियानी




इस इंतिहा-ए-तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद
हम ने लिया है नाम तुम्हारा कभी कभी

अर्श मलसियानी




जितनी वो मिरे हाल पे करते हैं जफ़ाएँ
आता है मुझे उन की मोहब्बत का यक़ीं और

More the cruelty from her that I receive
more in her affection for me do I believe

अर्श मलसियानी




ख़ुश्क बातों में कहाँ है शैख़ कैफ़-ए-ज़िंदगी
वो तो पी कर ही मिलेगा जो मज़ा पीने में है

o priest where is the pleasure in this world when dry and sere
tis only when one drinks will then the joy truly appea

अर्श मलसियानी




मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी

अर्श मलसियानी




मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है
ख़मोशी भी है ये आवाज़ भी है

अर्श मलसियानी




तौबा तौबा ये बला-ख़ेज़ जवानी तौबा
देख कर उस बुत-ए-काफ़िर को ख़ुदा याद आया

अर्श मलसियानी




वो सहरा जिस में कट जाते हैं दिन याद-ए-बहाराँ से
ब-अल्फ़ाज़-ए-दिगर उस को चमन कहना ही पड़ता है

अर्श मलसियानी




तिरी दुनिया को ऐ वाइज़ मिरी दुनिया से क्या निस्बत
तिरी दुनिया में तक़दीरें मेरी दुनिया में तदबीरें

अर्श मलसियानी