ख़ाक थी और जिस्म ओ जाँ कहते रहे
चंद ईंटों को मकाँ कहते रहे
it is dust that you for a body espouse
it is few bricks and you call it a house
साग़र मेहदी
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ख़ाक थी और जिस्म ओ जाँ कहते रहे
चंद ईंटों को मकाँ कहते रहे
it is dust that you for a body espouse
it is few bricks and you call it a house
साग़र मेहदी