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साग़र मेहदी शायरी | शाही शायरी

साग़र मेहदी शेर

1 शेर

ख़ाक थी और जिस्म ओ जाँ कहते रहे
चंद ईंटों को मकाँ कहते रहे

it is dust that you for a body espouse
it is few bricks and you call it a house

साग़र मेहदी