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वाहिद प्रेमी शायरी | शाही शायरी

वाहिद प्रेमी शेर

28 शेर

मेरी दीवानगी-ए-इश्क़ है इक दर्स-ए-जहाँ
मेरे गिरने से बहुत लोग सँभल जाते हैं

वाहिद प्रेमी




किस शान किस वक़ार से किस बाँकपन से हम
गुज़रे हैं आज़माइश-ए-दार-ओ-रसन से हम

वाहिद प्रेमी




किसी को बे-सबब शोहरत नहीं मिलती है ऐ 'वाहिद'
उन्हीं के नाम हैं दुनिया में जिन के काम अच्छे हैं

वाहिद प्रेमी




कोई गर्दिश हो कोई ग़म हो कोई मुश्किल हो
जिस को आना हो हमारे वो मुक़ाबिल आए

वाहिद प्रेमी




कोई हंगामा-ए-हयात नहीं
रात ख़ामोश है सहर ख़ामोश

वाहिद प्रेमी




क्यूँ शिकवा-ए-बे-मेहरी-ए-साक़ी है लबों पर
पीना है तो ख़ुद बढ़ के पियो बादा-गुसारो

वाहिद प्रेमी




मैं औरों को क्या परखूँ आइना-ए-आलम में
मुहताज-ए-शनासाई जब अपना ही चेहरा है

वाहिद प्रेमी




उफ़ गर्दिश-ए-हयात तिरी फ़ित्ना-साज़ियाँ
अपने वतन में दूर हैं अहल-ए-वतन से हम

वाहिद प्रेमी




शख़्सिय्यत-ए-फ़नकार मुअ'म्मा नहीं 'वाहिद'
फ़न ही में हुआ करता है फ़नकार का परतव

वाहिद प्रेमी