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सय्यद आबिद अली आबिद शायरी | शाही शायरी

सय्यद आबिद अली आबिद शेर

28 शेर

उन्हीं को अर्ज़-ए-वफ़ा का था इश्तियाक़ बहुत
उन्हीं को अर्ज़-ए-वफ़ा ना-गवार गुज़री है

सय्यद आबिद अली आबिद




मुझे धोका हुआ कि जादू है
पावँ बजते हैं तेरे बिन छागल

सय्यद आबिद अली आबिद




साक़िया है तिरी महफ़िल में ख़ुदाओं का हुजूम
महफ़िल-अफ़रोज़ हो इंसाँ तो मज़ा आ जाए

सय्यद आबिद अली आबिद




शब-ए-हिज्राँ की दराज़ी से परेशान न था
ये तेरी ज़ुल्फ़-ए-रसा है मुझे मालूम न था

सय्यद आबिद अली आबिद




शरअ-ओ-आईन की ताज़ीर के बा-वस्फ़ शबाब
लब-ओ-रुख़्सार की जानिब निगराँ है कि जो था

सय्यद आबिद अली आबिद




सुबू उठा कि ये नाज़ुक मक़ाम है साक़ी
न अहरमन है न यज़्दाँ है देखिए क्या हो

सय्यद आबिद अली आबिद




तेरे ख़ुश-पोश फ़क़ीरों से वो मिलते तो सही
जो ये कहते हैं वफ़ा पैरहन-ए-चाक में है

सय्यद आबिद अली आबिद




ये हादिसा भी हुआ है कि इश्क़-ए-यार की याद
दयार-ए-क़ल्ब से बेगाना-वार गुज़री है

सय्यद आबिद अली आबिद




यही दिल जिस को शिकायत है गिराँ-जानी की
यही दिल कार-गह-ए-शीशा-गिराँ होता है

सय्यद आबिद अली आबिद