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मुज़्तर ख़ैराबादी शायरी | शाही शायरी

मुज़्तर ख़ैराबादी शेर

199 शेर

निछावर बुत-कदे पर दिल करूँ का'बा तो कोसों है
कहाँ ले जाऊँ इतनी दूर क़ुर्बानी मोहब्बत की

मुज़्तर ख़ैराबादी