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मीर असर शायरी | शाही शायरी

मीर असर शेर

23 शेर

तू ही बेहतर है आइना हम से
हम तो इतने भी रू-शनास नहीं

मीर असर




न कहा जाए कि दुश्मन न कहा जाए कि दोस्त
कुछ समझ में नहीं आता है 'असर' कौन है वो

मीर असर




पहले सौ बार इधर उधर देखा
जब तुझे डर के इक नज़र देखा

मीर असर




राह पर उन को लगा लाए तो हैं बातों में
और खुल जाएँगे दो-चार मुलाक़ातों में

मीर असर




रक़ीब देख सँभल कर के सामने आना
बरहना तेग़ हैं इक दस्त-ए-रोज़गार में हम

मीर असर




तेरे आने का एहतिमाल रहा
मरते मरते भी ये ख़याल रहा

मीर असर




यार ग़ुस्सा तिरी बला खावे
काम निकले जो मुस्कुराने से

मीर असर




यूँ ख़ुदा की ख़ुदाई बर-हक़ है
पर 'असर' की हमें तो आस नहीं

मीर असर




यूँ आग में से भाग निकलना नज़र बचा
अपने तईं तो वज़्अ' न भाई शरार की

मीर असर