कश्तियाँ टूट गई हैं सारी
अब लिए फिरता है दरिया हम को
बाक़ी सिद्दीक़ी
तुम ज़माने की राह से आए
वर्ना सीधा था रास्ता दिल का
बाक़ी सिद्दीक़ी
उन का या अपना तमाशा देखो
जो दिखाता है ज़माना देखो
बाक़ी सिद्दीक़ी
वक़्त का पत्थर भारी होता जाता है
हम मिट्टी की सूरत देते जाते हैं
बाक़ी सिद्दीक़ी
वक़्त के पास हैं कुछ तस्वीरें
कोई डूबा है कि उभरा देखो
बाक़ी सिद्दीक़ी
यही रस्ता है अब यही मंज़िल
अब यहीं दिल किसी बहाने लगे
बाक़ी सिद्दीक़ी
यूँ भी होने का पता देते हैं
अपनी ज़ंजीर हिला देते हैं
बाक़ी सिद्दीक़ी
ज़िंदगी की बिसात पर 'बाक़ी'
मौत की एक चाल हैं हम लोग
बाक़ी सिद्दीक़ी
'बाक़ी' जो चुप रहोगे तो उट्ठेंगी उँगलियाँ
है बोलना भी रस्म-ए-जहाँ बोलते रहो
बाक़ी सिद्दीक़ी

