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अली जव्वाद ज़ैदी शायरी | शाही शायरी

अली जव्वाद ज़ैदी शेर

26 शेर

मोनिस-ए-शब रफ़ीक़-ए-तन्हाई
दर्द-ए-दिल भी किसी से कम तो नहीं

अली जव्वाद ज़ैदी




हिज्र की रात ये हर डूबते तारे ने कहा
हम न कहते थे न आएँगे वो आए तो नहीं

अली जव्वाद ज़ैदी




जब छेड़ती हैं उन को गुमनाम आरज़ुएँ
वो मुझ को देखते हैं मेरी नज़र बचा के

अली जव्वाद ज़ैदी




जब कभी देखा है ऐ 'ज़ैदी' निगाह-ए-ग़ौर से
हर हक़ीक़त में मिले हैं चंद अफ़्साने मुझे

अली जव्वाद ज़ैदी




जिन हौसलों से मेरा जुनूँ मुतमइन न था
वो हौसले ज़माने के मेयार हो गए

अली जव्वाद ज़ैदी




लज़्ज़त-ए-दर्द मिली इशरत-ए-एहसास मिली
कौन कहता है हम उस बज़्म से नाकाम आए

अली जव्वाद ज़ैदी




मिरे हाथ सुलझा ही लेंगे किसी दिन
अभी ज़ुल्फ़-ए-हस्ती में ख़म है तो क्या ग़म

अली जव्वाद ज़ैदी




पी तो लूँ आँखों में उमडे हुए आँसू लेकिन
दिल पे क़ाबू भी तो हो ज़ब्त का यारा भी तो हो

अली जव्वाद ज़ैदी




ये दुश्मनी है साक़ी या दोस्ती है साक़ी
औरों को जाम देना मुझ को दिखा दिखा के

अली जव्वाद ज़ैदी