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वो कौन था | शाही शायरी
wo kaun tha

नज़्म

वो कौन था

शहरयार

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वो कौन था वो कौन था
तिलिस्म-ए-शहर-ए-आरज़ू जो तोड़ कर चला गया

हर एक तार रूह का झिंझोड़ कर चला गया
मुझे ख़ला के बाज़ुओं में छोड़ कर चला गया

सितम-शिआर आसमाँ तो था नहीं
उदासियों का राज़-दाँ तो था नहीं

वो मेरा जिस्म-ए-ना-तावाँ तो था नहीं
तो कौन था

वो कौन था?