किसी इक-आध मय-कश से ख़ता कुछ हो गई होगी
मगर क्यूँ मय-कदे का मय-कदा बद-नाम है साक़ी
कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
मरना तो लाज़िम है इक दिन जी भर के अब जी तो लूँ
मरने से पहले मर जाना मेरे बस की बात नहीं
कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
मिरे सवाल-ए-विसाल पर तुम नज़र झुका कर खड़े हुए हो
तुम्हीं बताओ ये बात क्या है सवाल पूरा जवाब आधा
कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
मुस्कुराना कभी न रास आया
हर हँसी एक वारदात बनी
कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
फिर इस के बाद हमें तिश्नगी रहे न रहे
कुछ और देर मुरव्वत से काम ले साक़ी
कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
साक़ी मय साग़र पैमाना मेरे बस की बात नहीं
सिर्फ़ इन्ही से दिल बहलाना मेरे बस की बात नहीं
कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
शोख़ी शबाब हुस्न तबस्सुम हया के साथ
दिल ले लिया है आप ने किस किस अदा के साथ
कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर

