EN اردو
शकील जमाली शायरी | शाही शायरी

शकील जमाली शेर

23 शेर

रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे
हर साज़िश के पीछे अपने निकलेंगे

शकील जमाली




लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं
इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं

शकील जमाली




मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग
अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए

शकील जमाली




मसअला ख़त्म हुआ चाहता है
दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है

शकील जमाली




मौत को हम ने कभी कुछ नहीं समझा मगर आज
अपने बच्चों की तरफ़ देख के डर जाते हैं

शकील जमाली




मौत को हम ने कभी कुछ नहीं समझा मगर आज
अपने बच्चों की तरफ़ देख के डर जाते हैं

शकील जमाली




तुम्हारे बा'द बड़ा फ़र्क़ आ गया हम में
तुम्हारे बा'द किसी पे ख़फ़ा नहीं हुए हम

शकील जमाली




ज़िंदगी ऐसे भी हालात बना देती है
लोग साँसों का कफ़न ओढ़ के मर जाते हैं

शकील जमाली




उम्र का एक और साल गया
वक़्त फिर हम पे ख़ाक डाल गया

शकील जमाली