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सऊद उस्मानी शायरी | शाही शायरी

सऊद उस्मानी शेर

25 शेर

उन से भी मेरी दोस्ती उन से भी रंजिशें
सीने में एक हल्क़ा-ए-अहबाब और है

सऊद उस्मानी




नज़र तो अपने मनाज़िर के रम्ज़ जानती है
कि आँख कह नहीं सकती सुनी-सुनाई हुई

सऊद उस्मानी




पक्का रस्ता कच्ची सड़क और फिर पगडंडी
जैसे कोई चलते चलते थक जाता है

सऊद उस्मानी




समझ लिया था तुझे दोस्त हम ने धोके में
सो आज से तुझे बार-ए-दिगर समझते हैं

सऊद उस्मानी




सूरज के उफ़ुक़ होते हैं मंज़िल नहीं होती
सो ढलता रहा जलता रहा चलता रहा मैं

सऊद उस्मानी




तमाम उम्र यहाँ किस का इंतिज़ार हुआ है
तमाम उम्र मिरा कौन इंतिज़ार करेगा

सऊद उस्मानी




तेरी शिकस्त अस्ल में मेरी शिकस्त है
तू मुझ से एक बार भी हारा तो मैं गया

सऊद उस्मानी




ये जो मैं इतनी सहूलत से तुझे चाहता हूँ
दोस्त इक उम्र में मिलती है ये आसानी भी

सऊद उस्मानी




ये तो दुनिया भी नहीं है कि किनारा कर ले
तू कहाँ जाएगा ऐ दिल के सताए हुए शख़्स

सऊद उस्मानी