मैं उस की नज़रों का कुछ इस लिए भी हूँ क़ाइल
वो जिस को चाहे उसे देखना सिखाता है
राना आमिर लियाक़त
मैं जानता हूँ मोहब्बत में क्या नहीं करना
ये वो जगह है जहाँ क़ैस भी फिसलता है
राना आमिर लियाक़त
मैं हाव-हू पे कहानी को ख़त्म कर दूँगा
ये आम बात नहीं है, इसे ख़बर लिया जाए
राना आमिर लियाक़त
मानूस रौशनी हुई मेरे मकान से
वो जिस्म जब निकल गया रेशम के थान से
राना आमिर लियाक़त
आओ आँखें मिला के देखते हैं
कौन कितना उदास रहता है
राना आमिर लियाक़त
कई तरह के तहाइफ़ पसंद हैं उस को
मगर जो काम यहाँ फूल से निकलता है
राना आमिर लियाक़त
इस दौर-ए-ना-मुराद से ये तजरबा हुआ
दीवार गुफ़्तुगू के लिए बेहतरीन है
राना आमिर लियाक़त
ईंट से ईंट जोड़ कर, ख़्वाब बना रहा हूँ मैं
रख़्ने न डाल मेरे यार' ख़्वाब की देख-भाल में
राना आमिर लियाक़त
हज़ार रस्ते तिरे हिज्र के इलाज के हैं
हम अहल-ए-इश्क़ ज़रा मुख़्तलिफ़ मिज़ाज के हैं
राना आमिर लियाक़त

