साँस में साजना हवा की तरह
साँस का सिलसिला हवा से है
नासिर शहज़ाद
पाटी हैं हम ने बिफरी चनाबें तिरे लिए
हम ले गए हैं तुझ को स्वयंवर से जीत के
नासिर शहज़ाद
फिर मुझे मिल नदी किनारे कहीं
फिर बढ़ा मान आ के राहों का
नासिर शहज़ाद
फिर यूँ हुआ कि मुझ से वो यूँही बिछड़ गया
फिर यूँ हुआ कि ज़ीस्त के दिन यूँही कट गए
नासिर शहज़ाद
पुस्तकों में प्रानों में अर्ज़ों में आसमानों में
एक नाम की भगती एक क़ौल का कलिमा
नासिर शहज़ाद
क़ाएम है आबरू तो ग़नीमत यही समझ
मैले से हैं जो कपड़े फटा सा जो बूट है
नासिर शहज़ाद
संगत दिलों की जीवनों मरणों का इर्तिबात
फिर डर पड़ा था क्या तुझे गिर्द-ओ-नवाह का
नासिर शहज़ाद
उम्रों के बुझते मामूरे में
मैं ने हर लम्हा तुझ को सोचा
नासिर शहज़ाद
तुझे पछाड़ न दें रौशनी में तेरे रफ़ीक़
दया बुझे न बुझे तो भी फूँक मार तो ले
नासिर शहज़ाद

