मय-कशो आगे बढ़ो तिश्ना-लबो आगे बढ़ो
अपना हक़ माँगा नहीं जाता है छीना जाए है
कैफ़ भोपाली
सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है
हँसता चेहरा एक बहाना लगता है
कैफ़ भोपाली
साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का
उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ
कैफ़ भोपाली
मुझे मुस्कुरा मुस्कुरा कर न देखो
मिरे साथ तुम भी हो रुस्वाइयों में
कैफ़ भोपाली
मत देख कि फिरता हूँ तिरे हिज्र में ज़िंदा
ये पूछ कि जीने में मज़ा है कि नहीं है
कैफ़ भोपाली
माँ की आग़ोश में कल मौत की आग़ोश में आज
हम को दुनिया में ये दो वक़्त सुहाने से मिले
कैफ़ भोपाली
कुछ मोहब्बत को न था चैन से रखना मंज़ूर
और कुछ उन की इनायात ने जीने न दिया
कैफ़ भोपाली
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
कैफ़ भोपाली
मैं ने जब पहले-पहल अपना वतन छोड़ा था
दूर तक मुझ को इक आवाज़ बुलाने आई
कैफ़ भोपाली

